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Class 10 Hindi
Chapter 3

मनुष्यता

'मनुष्यता' कविता का मुख्य संदेश यह है कि सच्चा मनुष्य वही है जो अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर परोपकार, उदारता और दूसरों के हित के लिए अपना जीवन समर्पित कर दे।

मनुष्यता - पाठ सार एवं शब्दार्थ

मनुष्यता - पाठ सार एवं शब्दार्थ
पाठ परिचय

मैथिलीशरण गुप्त की यह कविता हमें 'पशु-प्रवृत्ति' (केवल अपने लिए जीना) को त्यागकर 'देव-प्रवृत्ति' (दूसरों के लिए जीना) अपनाने की प्रेरणा देती है। कवि बताते हैं कि परोपकार ही मनुष्य का असली धर्म है।

काव्यांश 1

विचार लो कि मर्त्य हो न मृत्यु से डरो कभी,
मरो परन्तु यों मरो कि याद जो करें सभी।
हुई न यों सुमृत्यु तो वृथा मरे, वृथा जिए,
मरा नहीं वही कि जो जिया न आपके लिए।
वही पशु-प्रवृत्ति है कि आप आप ही चरे,
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।।

व्याख्या कवि कहते हैं कि हमें यह जान लेना चाहिए कि शरीर नश्वर (मरने वाला) है, इसलिए मृत्यु से कभी नहीं डरना चाहिए। हमें ऐसी मौत मरना चाहिए कि दुनिया हमें याद रखे (सुमृत्यु)। यदि किसी ने परोपकार नहीं किया, तो उसका जीना और मरना दोनों बेकार (वृथा) है। जो व्यक्ति दूसरों के लिए नहीं जीता, वह वास्तव में मरे हुए के समान है। केवल अपना पेट भरना तो जानवरों (पशु) का स्वभाव है। सच्चा मनुष्य वही है जो दूसरों की भलाई के लिए अपने प्राण दे दे।

शब्दार्थ:
शब्दअर्थ
मर्त्यमरणशील / नश्वर
सुमृत्युगौरवशाली मृत्यु
वृथाबेकार / व्यर्थ
पशु-प्रवृत्तिजानवरों जैसा स्वभाव

काव्यांश 2

उसी उदार की कथा सरस्वती बखानती,
उसी उदार से धरा कृतार्थ भाव मानती।
उसी उदार की सदा सजीव कीर्ति कूजती;
तथा उसी उदार को समस्त सृष्टि पूजती।
अखंड आत्मभाव जो असीम विश्व में भरे,
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।।

व्याख्या कवि कहते हैं कि जो व्यक्ति पूरे विश्व को अपना परिवार मानता है (उदार व्यक्ति), इतिहास और पुस्तकें (सरस्वती) उसी का गुणगान करती हैं। धरती (धरा) भी ऐसे व्यक्ति के प्रति आभारी रहती है। ऐसे दानी व्यक्ति का यश हमेशा गूँजता रहता है और पूरी दुनिया उसे पूजती है। जो व्यक्ति इस विशाल संसार में एकता और आत्मीयता (अपनापन) का भाव फैलाता है, वही सच्चा मनुष्य है।

शब्दअर्थ
बखानतीवर्णन करती है
कृतार्थआभारी / धन्य
कूजतीगूँजती है / चर्चा होती है
अखंडजिसके टुकड़े न हों (पूरा)

काव्यांश 3

क्षुधार्त रंतिदेव ने दिया करस्थ थाल भी,
तथा दधीचि ने दिया परार्थ अस्थिजाल भी।
उशीनर क्षितीश ने स्व-मांस दान भी किया,
सहर्ष वीर कर्ण ने शरीर-चर्म भी दिया।
अनित्य देह के लिए अनादि जीव क्या डरे?
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।।

व्याख्या कवि पौराणिक वीरों का उदाहरण देते हैं:
1. भूख से व्याकुल (क्षुधार्त) रंतिदेव ने हाथ में आई हुई भोजन की थाली एक भिक्षु को दे दी।
2. महर्षि दधीचि ने परोपकार (असुरों के नाश) के लिए अपनी हड्डियाँ (अस्थिजाल) दान कर दीं।
3. गंधार देश के राजा उशीनर (शिवि) ने कबूतर की रक्षा के लिए अपना मांस काटकर दे दिया।
4. दानवीर कर्ण ने खुशी-खुशी अपने शरीर का कवच-कुंडल (शरीर-चर्म) दे दिया।
कवि कहते हैं कि जब यह शरीर नश्वर (अनित्य) है, तो अमर आत्मा (जीव) को मरने से क्या डरना?

शब्दअर्थ
क्षुधार्तभूख से पीड़ित
करस्थहाथ में रखा हुआ
परार्थदूसरों की भलाई के लिए
क्षितीशराजा
अनित्यनश्वर (जो मिट जाए)

काव्यांश 4

सहानुभूति चाहिए, महाविभूति है यही;
वशीकृता सदैव है बनी हुई स्वयं मही।
विरुद्धवाद बुद्ध का दया-प्रवाह में बहा,
विनीत लोकवर्ग क्या न सामने झुका रहा?
अहा! वही उदार है परोपकार जो करे,
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।।

व्याख्या मनुष्य के मन में दया और सहानुभूति होनी चाहिए, यही दुनिया की सबसे बड़ी दौलत (महाविभूति) है। दयालु व्यक्ति के वश में तो यह पूरी धरती (मही) रहती है। भगवान बुद्ध ने जब दया का संदेश दिया, तो उनके विरोधी विचार भी उस दया की धारा में बह गए और पूरी दुनिया विनम्र होकर उनके सामने झुक गई। सचमुच वही उदार है जो परोपकार करता है।

शब्दअर्थ
महाविभूतिसबसे बड़ी संपत्ति
वशीकृतावश में की हुई
महीधरती
विनीतविनम्र / झुका हुआ

काव्यांश 5

रहो न भूल के कभी मदांध तुच्छ वित्त में,
सनाथ जान आपको करो न गर्व चित्त में।
अनाथ कौन है यहाँ? त्रिलोकनाथ साथ हैं,
दयालु दीनबंधु के बड़े विशाल हाथ हैं।
अतीव भाग्यहीन है अधीर भाव जो करे,
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।।

व्याख्या कवि चेतावनी देते हैं कि धन-संपत्ति (वित्त) तो मामूली चीज है, इसके नशे में अंधे होकर कभी घमंड मत करना। अपने परिवार या धन के बल पर खुद को 'सनाथ' (सुरक्षित) मानकर अहंकार मत करो। यहाँ कोई भी 'अनाथ' नहीं है क्योंकि ईश्वर (त्रिलोकनाथ) सबके साथ हैं। वे बहुत दयालु हैं और उनकी मदद के हाथ बहुत विशाल हैं। जो व्यक्ति घबराता है (अधीर होता है) और ईश्वर पर भरोसा नहीं रखता, वह बहुत भाग्यहीन है।

शब्दअर्थ
मदांधघमंड में अंधा
वित्तधन
चित्तमन / हृदय
दीनबंधुईश्वर (गरीबों के मित्र)
अधीरबेचैन / धैर्यहीन

काव्यांश 6

अनंत अंतरिक्ष में अनंत देव हैं खड़े,
समक्ष ही स्वबाहु जो बढ़ा रहे बड़े-बड़े।
परस्परावलम्ब से उठो तथा बढ़ो सभी,
अभी अमर्त्य-अंक में अपंक हो चढ़ो सभी।
रहो न यों कि एक से न काम और का सरे,
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।।

व्याख्या आकाश में असंख्य देवता खड़े हैं जो परोपकारी लोगों के स्वागत के लिए अपनी बाहें फैलाए हुए हैं। इसलिए हे मनुष्यों! एक-दूसरे का सहारा बनकर (परस्परावलम्ब) आगे बढ़ो और ऊँचाइयों को छुओ। पाप-रहित (अपंक) होकर तुम सीधे देवताओं की गोद (अमर्त्य-अंक) में जाओ। इस तरह मत जिओ कि तुम किसी के काम न आ सको और तुम्हारा काम भी किसी के बिना न चले (सब मिलजुल कर रहो)।

शब्दअर्थ
समक्षसामने
परस्परावलम्बएक-दूसरे का सहारा
अमर्त्य-अंकदेवताओं की गोद
अपंककीचड़ रहित / निष्पाप

काव्यांश 7

मनुष्य मात्र बंधु है यही बड़ा विवेक है,
पुराणपुरुष स्वयंभू पिता प्रसिद्ध एक है।
फलानुसार कर्म के अवश्य बाह्य भेद हैं,
परंतु अंतरैक्य में प्रमाणभूत वेद हैं।
अनर्थ है कि बंधु ही न बंधु की व्यथा हरे,
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।।

व्याख्या सबसे बड़ा ज्ञान (विवेक) यही है कि हम यह समझें कि सभी मनुष्य भाई-भाई हैं। हम सबका पिता एक ही परमात्मा (स्वयंभू) है। भले ही हमारे कर्मों के अनुसार हमारा रूप-रंग और जीवन स्तर (बाहरी भेद) अलग हो, लेकिन वेदों के अनुसार हम सबकी आत्मा एक (अंतरैक्य) है। यह सबसे बड़ा पाप (अनर्थ) है कि एक भाई दूसरे भाई की पीड़ा (व्यथा) दूर न करे।

शब्दअर्थ
विवेकबुद्धि / समझ
स्वयंभूपरमात्मा (स्वयं उत्पन्न)
अंतरैक्यआत्मा की एकता
व्यथाकष्ट / पीड़ा

काव्यांश 8

चलो अभीष्ट मार्ग में सहर्ष खेलते हुए,
विपत्ति, विघ्न जो पड़ें उन्हें ढकेलते हुए।
घटे न हेल-मेल हाँ, बढ़े न भिन्नता कभी,
अतर्क एक पंथ के सतर्क पंथ हों सभी।
तभी समर्थ भाव है कि तारता हुआ तरे,
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।।

व्याख्या कवि कहते हैं कि अपने जीवन के लक्ष्य (अभीष्ट मार्ग) पर खुशी-खुशी आगे बढ़ो। रास्ते में जो भी मुसीबतें (विपत्ति) आएं, उन्हें हटाते हुए चलो। लेकिन ध्यान रहे कि आपस का प्रेम (हेल-मेल) कम न हो और भेदभाव न बढ़े। हम सब बिना किसी तर्क-वितर्क (लड़ाई) के सावधानी से एकता के रास्ते पर चलें। सच्ची सफलता (समर्थ भाव) वही है जब हम खुद भी तरें (उन्नति करें) और दूसरों को भी साथ लेकर तारें।

शब्दअर्थ
अभीष्टइच्छित / चाहा हुआ
विपत्तिमुसीबत
अतर्कतर्क से परे / बिना विवाद
तारताउद्धार करता हुआ
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मनुष्यता व्याख्या

कक्षा 10 सीबीएसई हिंदी (पाठ्यक्रम बी) स्पर्श अध्याय 3 मैथिली शरण गुप्त द्वारा रचित कविता मनुष्यता की आसान भाषा में व्याख्या की गई है।

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Manushyata Question - Answer

कक्षा 10 सीबीएसई हिंदी (पाठ्यक्रम बी) स्पर्श अध्याय 4 मैथिली शरण गुप्त द्वारा रचित कविता मनुष्यता के पाठ्य -पुस्तक के प्रश्नोत्तर तथा परिक्षोपयोगी अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर का समावेश है ।

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Manushyata MCQ

कक्षा 10 सीबीएसई हिंदी (पाठ्यक्रम बी) स्पर्श अध्याय 4 मनुष्यता पाठ के बहुविकल्पात्मक -प्रश्न करवाएं गए हैं।

Textbook Questions
Q1: कवि ने कैसी मृत्यु को 'सुमृत्यु' कहा है?
Ans: कवि के अनुसार, सुमृत्यु वह है जिसे मरने के बाद भी लोग सम्मानपूर्वक याद रखें। जिस मनुष्य ने अपना जीवन परोपकार और लोक-कल्याण में बिताया हो, उसकी मृत्यु व्यर्थ नहीं जाती। उसका यश मरने के बाद भी अमर रहता है।
Q2: उदार व्यक्ति की पहचान कैसे हो सकती है?
Ans: उदार व्यक्ति वह है जो पूरे संसार को अपना परिवार मानता है। वह अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर दूसरों की भलाई के लिए कार्य करता है। उसके मन में दया, करुणा और आत्मीयता का भाव होता है। सरस्वती (इतिहास) भी ऐसे ही व्यक्ति का गुणगान करती है।
Q3: कवि ने दधीचि, कर्ण आदि महान व्यक्तियों का उदाहरण देकर 'मनुष्यता' के लिए क्या संदेश दिया है?
Ans: कवि ने इन पौराणिक पात्रों का उदाहरण देकर यह संदेश दिया है कि यह शरीर नश्वर (मिटने वाला) है, इसलिए इसके मोह में न पड़कर हमें परोपकार करना चाहिए। जैसे दधीचि ने हड्डियों का और कर्ण ने कवच का दान दिया, वैसे ही हमें भी त्याग और बलिदान के लिए तत्पर रहना चाहिए।
Q4: कवि ने किन पंक्तियों में यह व्यक्त किया है कि हमें गर्व रहित जीवन व्यतीत करना चाहिए?
Ans: कवि ने इन पंक्तियों में कहा है: "रहो न भूल के कभी मदांध तुच्छ वित्त में, सनाथ जान आपको करो न गर्व चित्त में।" इसका अर्थ है कि धन-संपत्ति के नशे में कभी घमंड नहीं करना चाहिए और न ही खुद को बड़ा मानकर दूसरों को अनाथ या कमजोर समझना चाहिए।
Q5: ‘मनुष्य मात्र बंधु है’ से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए।
Ans: इसका अर्थ है कि संसार के सभी मनुष्य एक ही ईश्वर की संतान हैं, इसलिए हम सब आपस में भाई-भाई हैं। बाहरी रूप-रंग या कर्म अलग हो सकते हैं, लेकिन हमारी आत्मा एक है। इसलिए हमें जाति, धर्म या देश के भेदभाव को भुलाकर भाईचारे से रहना चाहिए।
Q6: कवि ने सबको एक साथ चलने की प्रेरणा क्यों दी है?
Ans: कवि जानते हैं कि एकता में ही शक्ति है। जब हम एक-दूसरे का सहारा बनकर (परस्परावलंब) चलेंगे, तो कठिन से कठिन बाधाएँ (विघ्न) भी आसानी से दूर हो जाएंगी। इससे समाज की उन्नति होगी और हम अपने लक्ष्य (मानवता) को प्राप्त कर सकेंगे।
Q7: व्यक्ति को किस प्रकार का जीवन व्यतीत करना चाहिए? इस कविता के आधार पर लिखिए।
Ans: व्यक्ति को स्वार्थहीन और परोपकारी जीवन जीना चाहिए। उसे धन का घमंड नहीं करना चाहिए और दीन-दुखियों की मदद करनी चाहिए। उसे 'पशु-प्रवृत्ति' (केवल अपना पेट भरना) त्यागकर 'मनुष्यता' (दूसरों के लिए जीना) को अपनाना चाहिए।
Q8: ‘मनुष्यता’ कविता के माध्यम से कवि क्या संदेश देना चाहता है?
Ans: कवि यह संदेश देना चाहते हैं कि सच्चा मानव वही है जो दूसरों के दुख-दर्द को समझे और उनकी मदद करे। हमें विश्व-बंधुत्व, त्याग, सहानुभूति और प्रेम के मार्ग पर चलना चाहिए। यही मानवता का सच्चा धर्म है।
Extra Questions
Q9: पशु-प्रवृत्ति और मनुष्य-प्रवृत्ति में क्या अंतर है?
Ans: पशु-प्रवृत्ति का अर्थ है केवल अपने लिए जीना और अपना पेट भरना। पशुओं को दूसरों के सुख-दुख से मतलब नहीं होता। इसके विपरीत, मनुष्य-प्रवृत्ति का अर्थ है परोपकार करना। सच्चा मनुष्य अपने स्वार्थ का त्याग कर दूसरों के हित के लिए जीता और मरता है।
Q10: भगवान बुद्ध के "विरूद्धवाद" का क्या हुआ और क्यों?
Ans: भगवान बुद्ध ने तत्कालीन समय की रूढ़ियों और हिंसा का विरोध किया था। उनकी करुणा और प्रेम की भावना इतनी प्रबल थी कि समाज का विरोध (विरूद्धवाद) उनके सामने झुक गया और लोग उनके अनुयायी बन गए। दया ही सबसे बड़ी शक्ति है।
1. कवि ने "सुमृत्यु" किसे कहा है?
A जो युद्ध में होती है
B जो वृद्धावस्था में होती है
C जिसे मरने के बाद भी याद किया जाए
D जो बिना दर्द के हो
Correct: C
सुमृत्यु वह है जिसे मरने के बाद भी दुनिया सम्मान के साथ याद रखे।
2. प्रस्तुत कविता में "रंतिदेव" किस गुण के लिए प्रसिद्ध हैं?
A युद्ध कौशल
B दान और परोपकार (भूख में भोजन दान)
C तपस्या
D क्रोध
Correct: B
रंतिदेव ने भूख से व्याकुल होते हुए भी अपनी थाली भिक्षु को दे दी थी।
3. महर्षि दधीचि ने किसके हित के लिए अपनी अस्थियाँ दान दी थीं?
A स्वयं के मोक्ष के लिए
B असुरों को बचाने के लिए
C देवताओं और मानवता की रक्षा (वृत्रासुर वध) के लिए
D धन प्राप्ति के लिए
Correct: C
दधीचि ने लोक-कल्याण हेतु वज्र बनाने के लिए अपनी हड्डियाँ दान कर दी थीं।
4. "मदांध" शब्द का सही अर्थ क्या है?
A मदरा पीने वाला
B गर्व/घमंड में अंधा
C मंद बुद्धि
D रास्ता भटकने वाला
Correct: B
मदांध का अर्थ है - संपत्ति या शक्ति के नशे (घमंड) में अंधा होना।
5. "मनुष्य मात्र बंधु है" - इस पंक्ति का क्या आशय है?
A सभी मनुष्य शत्रु हैं
B सभी मनुष्य मित्र हैं
C सभी मनुष्य भाई-भाई हैं (ईश्वर की संतान)
D मनुष्य केवल बंधा हुआ है
Correct: C
यह पंक्ति "वसुधैव कुटुम्बकम" और विश्व-बंधुत्व की भावना को दर्शाती है।
6. "उशीनर" के राजा (शिवि) ने किसकी रक्षा के लिए अपना मांस दिया था?
A गाय की
B कबूतर (कपोत) की
C शेर की
D बाज की
Correct: B
राजा शिवि ने बाज से कबूतर की रक्षा के लिए अपने शरीर का मांस काटकर दे दिया था।
7. "अनाथ" कौन है, कवि के अनुसार?
A जिसके माता-पिता न हों
B जो गरीब हो
C यहाँ कोई अनाथ नहीं है (ईश्वर सबके साथ हैं)
D जो अकेला हो
Correct: C
कवि कहते हैं "अनाथ कौन है यहाँ? त्रिलोकनाथ साथ हैं।"
8. "महाविभूति" किसे कहा गया है?
A बहुत सारा सोना
B वशीकरण मंत्र
C सहानुभूति और दया
D राज-पाठ
Correct: C
"सहानुभूति चाहिए, महाविभूति है यही।" - दया ही सबसे बड़ी संपत्ति है।
9. कर्ण ने क्या दान दिया था?
A अपना राज्य
B अपने प्राण
C अपना शरीर-चर्म (कवच-कुंडल)
D अपनी सेना
Correct: C
कर्ण ने खुशी-खुशी अपना रक्षा कवच दान कर दिया था।
10. बुद्ध का "विरुद्धवाद" दया के सामने क्यों झुक गया?
A उनके डर के कारण
B उनकी करुणा और लोक-कल्याण की भावना के कारण
C उनके शिष्यों के कारण
D उनके चमत्कार के कारण
Correct: B
बुद्ध की दया और प्रेम के आगे पुरानी रूढ़ियाँ और विरोध झुक गए।
11. पशु-प्रवृत्ति किसे कहा गया है?
A घास खाना
B आप-आप ही चरना (केवल अपना पेट भरना)
C जंगल में रहना
D शिकार करना
Correct: B
केवल अपने स्वार्थ के लिए जीना पशु-प्रवृत्ति है, मनुष्य प्रवृत्ति परोपकार है।
12. कवि ने "मृत्यु" से न डरने की बात क्यों कही है?
A क्योंकि मृत्यु एक अटल सत्य है
B क्योंकि हम अमर हैं
C क्योंकि डरने से मौत जल्दी आती है
D इनमें से कोई नहीं
Correct: A
चूंकि शरीर नश्वर है (मर्त्य), इसलिए मृत्यु से डरना व्यर्थ है।
13. सरस्वती (इतिहास) किसका बखान करती है?
A अमीर व्यक्ति का
B उदार और परोपकारी व्यक्ति का
C बलशाली व्यक्ति का
D सुंदर व्यक्ति का
Correct: B
इतिहास उन्ही का गुणगान करता है जो दुनिया में आत्मीयता फैलाते हैं।
14. "चलो अभीष्ट मार्ग में सहर्ष खेलते हुए" - यहाँ अभीष्ट मार्ग क्या है?
A खेल का मैदान
B जीवन का लक्ष्य (मानवता और एकता का पथ)
C घर जाने का रास्ता
D युद्ध का मैदान
Correct: B
हँसते-खेलते जीवन पथ पर आगे बढ़ना और दूसरों को साथ लेकर चलना।
15. कवि के अनुसार सच्चा "मनुष्य" कौन है?
A जो बहुत ज्ञानी हो
B जो शक्तिशाली हो
C जो मनुष्य के लिए मरे (दूसरों के काम आए)
D जो बहुत धनवान हो
Correct: C
"वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।"
16. "रहो न भूल के कभी मदांध तुच्छ वित्त में" - इसमें कवि क्या चेतावनी दे रहे हैं?
A पैसे को तिजोरी में रखें
B धन जैसी तुच्छ वस्तु पर कभी घमंड न करें
C पैसे खर्च न करें
D धन कमाने पर ध्यान दें
Correct: B
धन अस्थायी (तुच्छ) है, इस पर घमंड करना मूर्खता है।
17. "भिन्न वर्ग" होने पर भी भारतवासियों में क्या होना चाहिए?
A लड़ाई
B अंतैक्य (आंतरिक एकता)
C दूरी
D प्रतियोगिता
Correct: B
बाहरी रूप से अलग होते हुए भी आत्मा से हम सब एक हैं (अंतैक्य)।
18. पुराण पुरुष किसे कहा गया है?
A महर्षि वाल्मीकि को
B स्वयंभू पिता (परमात्मा) को
C राजा दशरथ को
D श्री राम को
Correct: B
सभी मनुष्यों के पिता एक ही परमात्मा (स्वयंभू) हैं।
19. "सहानुभूति चाहिए, महाविभूति है यही" - में कौन सा अलंकार है?
A यमक
B अनुप्रास
C श्लेष
D उपमा
Correct: B
'भूति' शब्द की तुकांतता और आवृत्ति के कारण अनुप्रास का सौंदर्य है।
20. "मनुष्य मात्र बंधु है" में निहित संदेश क्या है?
A राष्ट्रवाद
B विश्व-बंधुत्व (Global Brotherhood)
C परिवारवाद
D साम्यवाद
Correct: B
यह पूरी वसुधा (पृथ्वी) को एक परिवार मानने का संदेश है।
21. "मर्त्य" शब्द का विलोम क्या होगा?
A अमर
B मृत
C जीवन
D मानव
Correct: A
मर्त्य का अर्थ मरणशील है, विलोम अमर है।
22. "परस्परावलंब" का संधि-विच्छेद क्या है?
A परस्पर + अवलंब
B पर + स्परावलंब
C परस + परावलंब
D परस्पर + आवलंब
Correct: A
परस्पर + अवलंब (एक-दूसरे का सहारा)।
23. "तर्क" करने से क्या होता है?
A ज्ञान बढ़ता है
B लड़ाई होती है
C अनर्थ होता है
D समय बर्बाद होता है
Correct: C
कवि कहते हैं "वृथा न तर्क हो" यानी बेकार की बहस में एकता खंडित न हो।
24. "विघ्न" का अर्थ क्या है?
A सफलता
B रुकावट / बाधा
C विजय
D विशेष
Correct: B
विघ्न का अर्थ बाधाएं हैं जिन्हें हटाते हुए आगे बढ़ना है।
25. "उदार" शब्द का पर्यायवाची नहीं है?
A दानी
B महामना
C कृपण
D दरियादिल
Correct: C
कृपण का अर्थ कंजूस होता है, जो उदार का विलोम है।
26. "अमर्त्य अंक" में अपंक हो चढ़ो" - यहाँ "अमर्त्य अंक" का क्या अर्थ है?
A आकाश की गोद
B देवता की गोद (ईश्वर की शरण)
C माँ की गोद
D फूलों की शय्या
Correct: B
अमर्त्य का अर्थ है देवता/अमर, और अंक का अर्थ है गोद। यानी पवित्र बनकर ईश्वर की शरण में जाना।
27. "अपमृत्यु" से कवि का क्या तात्पर्य है?
A अचानक आई मृत्यु
B दर्दनाक मृत्यु
C व्यर्थ की मृत्यु (जिसमें परोपकार न हो)
D आत्महत्या
Correct: C
जिस मृत्यु से मानवता का कोई भला न हो, उसे कवि ने 'अपमृत्यु' (बुरी मौत) कहा है।
28. "कूजती" शब्द का कविता में क्या अर्थ है?
A गूँजती है / यशगान करती है
B चिड़िया की आवाज़
C बुरी जाति
D रोती है
Correct: A
"सरस्वती उदार की ही कथा कूजती" - यानी इतिहास उदार व्यक्ति का गुणगान करता है।
29. "कीर्ति-कौमुदी" का क्या अर्थ है?
A चाँदनी रात
B यश रूपी चाँदनी
C कमल का फूल
D प्रसिद्धि का शोर
Correct: B
कौमुदी का अर्थ चाँदनी है। उदार व्यक्ति का यश (कीर्ति) चाँदनी की तरह पूरी दुनिया में फैलता है।
30. "अखंड आत्मभाव" जो असीम विश्व में भरे - इसका क्या मतलब है?
A अकेले रहना
B आत्मा को खंडित करना
C पूरे विश्व को एक आत्मा (अपना रूप) समझना
D विश्व पर कब्जा करना
Correct: C
पूरी दुनिया के प्राणियों में अपने ही समान आत्मा देखना और उनसे प्रेम करना।
31. रंतिदेव ने भोजन की थाली किसे दी थी?
A अपने बेटे को
B एक अतिथि को
C भूखे भिक्षु/दीन-दुखी को
D कुत्ते को
Correct: C
स्वयं भूखे होते हुए भी उन्होंने अपनी थाली एक भूखे याचक को दे दी थी।
32. "परार्थ" शब्द का क्या अर्थ है?
A दूसरों की भलाई के लिए
B पैसे के लिए
C परमात्मा के लिए
D परीक्षा के लिए
Correct: A
दधीचि ने "परार्थ" (परोपकार हेतु) अपनी अस्थियाँ दी थीं।
33. उशीनर नरेश ने "स्व-मांस" क्यों दिया?
A अपनी ताकत दिखाने के लिए
B शरणागत (कबूतर) की रक्षा के लिए
C यज्ञ के लिए
D शर्त जीतने के लिए
Correct: B
राजा शिवि (उशीनर) ने बाज से कबूतर की जान बचाने के लिए अपने शरीर का मांस दिया।
34. "वशीकृता" किसे कहा गया है?
A दासी को
B पृथ्वी (धरती) को
C वश में की हुई स्त्री को
D विजय को
Correct: B
दयालु व्यक्ति के सामने "वशीकृता" होकर पृथ्वी (पूरी दुनिया) भी झुक जाती है और सेवा करती है।
35. "विनीत लोकवर्ग क्या न सामने झुका रहा?" - यहाँ "विनीत" का भाव क्या है?
A डरा हुआ
B विनम्र होकर (श्रद्धा से)
C हारा हुआ
D प्रार्थना करता हुआ
Correct: B
बुद्ध की करुणा देखकर विरोधी लोग भी विनम्रतापूर्वक उनके सामने नतमस्तक हो गए।
36. "रहो न भूल के कभी मदांध तुच्छ वित्त में" - यहाँ "वित्त" का क्या अर्थ है?
A मित्र
B धन-संपत्ति
C दीवार
D विपत्ति
Correct: B
वित्त का अर्थ धन है, जो कि तुच्छ (मामूली) है, उस पर घमंड नहीं करना चाहिए।
37. "अनंत अंतरिक्ष में अनंत देव हैं खड़े" - पंक्ति का उद्देश्य क्या है?
A डराना
B सत्कर्म करने वालों के स्वागत के लिए देवता तैयार हैं
C आकाश की सुंदरता बताना
D देवताओं की गिनती करना
Correct: B
कवि प्रेरित कर रहे हैं कि अच्छे काम करो, देवता स्वयं बाहें फैलाकर तुम्हारा स्वागत करेंगे।
38. "अपंक" होकर चढ़ने का क्या अर्थ है?
A कीचड़ लगाकर
B पंख लगाकर
C कलंक रहित (निष्पाप) होकर
D पैर धोकर
Correct: C
पंक का अर्थ कीचड़/पाप है। अपंक मतलब निष्पाप और पवित्र होकर ईश्वर के पास जाना।
39. "समर्थ भाव" किसे बताया गया है?
A दूसरों को धक्का देकर आगे बढ़ना
B अकेले सफल होना
C दूसरों को तारते (सफल बनाते) हुए स्वयं तरना
D शक्ति प्रदर्शन करना
Correct: C
सच्ची सामर्थ्य वही है जिसमें हम दूसरों की मदद करते हुए अपनी मंजिल पाएं।
40. "भिन्न वर्ण" होने पर भी हम एक कैसे हैं?
A हम सब भारतीय हैं
B हमारे कपड़े अलग हैं
C अंतैक्य (आत्मा की एकता) से
D हम सब मित्र हैं
Correct: C
वेद कहते हैं कि ऊपर से रूप-रंग (वर्ण) अलग होने पर भी भीतर से हमारी आत्मा (अंतैक्य) एक है।
41. "प्रमाणभूत वेद" क्या बताते हैं?
A इतिहास
B विज्ञान
C कि हम सबके पिता (परमात्मा) एक हैं (स्वयंभू)
D जाति व्यवस्था
Correct: C
वेद गवाह हैं कि सभी जीवात्माओं का मूल स्रोत एक ही परमपिता है।
42. कर्म के अनुसार क्या भिन्न हो सकता है?
A आत्मा
B ईश्वर
C बाह्य भेद (जीवन की परिस्थितियाँ)
D रक्त का रंग
Correct: C
"फलानुसार कर्म के अवश्य बाह्य भेद हैं" - हमारे बाहरी सुख-दुख कर्मों के फल हैं, पर अंदर से हम एक हैं।
43. "अनर्थ है कि बंधु ही न बंधु की व्यथा हरे" - यहाँ "व्यथा" का अर्थ है?
A कहानी
B कष्ट / पीड़ा
C पैसा
D समय
Correct: B
सबसे बड़ा अनर्थ (पाप) यह है कि एक भाई दूसरे भाई की पीड़ा दूर न करे।
44. रास्ते की "विपत्ति" और "विघ्न" को क्या करना चाहिए?
A देखकर डर जाना चाहिए
B ढकेलते (हटाते) हुए आगे बढ़ना चाहिए
C उन्हें स्वीकार कर लेना चाहिए
D रास्ता बदल लेना चाहिए
Correct: B
बाधाओं को "ढकेलते हुए" यानी हटाते हुए एकता के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
45. "सतर्क पंथ" का क्या आशय है?
A सावधानी से चलना
B तेज चलना
C रुके रहना
D अकेले चलना
Correct: A
जीवन के रास्ते पर सावधानी और जागरूकता के साथ चलना।
46. "अतृप्त" देवों के गोद में जाने का क्या मतलब है?
A देवता भूखे हैं
B संतुष्ट होकर स्वर्ग जाना
C देवताओं का प्यासा होना
D इनमें से कोई नहीं
Correct: B
यहाँ आशय है कि देवता भी ऐसे परोपकारी मनुष्य को अपनी गोद में लेने के लिए आतुर (अतृप्त/बेचैन) रहते हैं।
47. "स्वयंभू" शब्द किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
A ब्रह्मा जी के लिए
B परमात्मा (ईश्वर) के लिए
C धरती के लिए
D मनुष्य के लिए
Correct: B
स्वयंभू (स्वयं उत्पन्न होने वाला) यहाँ ईश्वर (परमपिता) के लिए आया है।
48. मैथिलीशरण गुप्त किस युग के कवि माने जाते हैं?
A भक्तिकाल
B छायावाद
C द्विवेदी युग
D आधुनिक काल (नई कविता)
Correct: C
वे द्विवेदी युग के प्रतिनिधि राष्ट्रकवि हैं।
49. इस कविता की भाषा कौन-सी है?
A ब्रज भाषा
B अवधी
C खड़ी बोली हिंदी
D संस्कृत
Correct: C
यह कविता शुद्ध और तत्सम प्रधान "खड़ी बोली हिंदी" में रचित है।
50. "उसी उदार की धरा कृतार्थ भाव मानती" - में "धरा" का अर्थ है?
A आसमान
B नदी
C पृथ्वी (धरती)
D धारा
Correct: C
उदार व्यक्ति के प्रति धरती भी अपना आभार (कृतार्थ) प्रकट करती है।
51. "बंधु" शब्द का विलोम कविता के संदर्भ में क्या हो सकता है?
A शत्रु / बैरी
B भाई
C सखा
D मित्र
Correct: A
बंधु मतलब भाई/मित्र, इसका उल्टा शत्रु।
52. दधीचि ने जो हड्डियां दीं, उनसे क्या बना था?
A सुदर्शन चक्र
B त्रिशूल
C वज्र
D धनुष
Correct: C
इंद्र का वज्र दधीचि की हड्डियों से बना था, जिससे वृत्रासुर का वध हुआ।
53. कवि के अनुसार हमें किसके लिए जीना चाहिए?
A अपने परिवार के लिए
B देश के लिए
C संपूर्ण मानवता के लिए
D सिर्फ अपने लिए
Correct: C
मनुष्यता का अर्थ है संपूर्ण मानवता (Humankind) के लिए जीना।
54. "चलो अभीष्ट मार्ग में सहर्ष खेलते हुए" - पंक्ति में कौन सा भाव है?
A दुख का
B उत्साह और आनंद का
C क्रोध का
D भय का
Correct: B
जीवन को एक खेल मानकर, खुशी-खुशी (सहर्ष) अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने का भाव है।
55. इस कविता का मुख्य स्वर (Tone) क्या है?
A व्यंग्यात्मक
B हास्य
C उपदेशात्मक / प्रेरणादायक
D करुण
Correct: C
यह कविता हमें नैतिक मूल्यों की प्रेरणा देती है, इसलिए यह उपदेशात्मक है।
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CBSE 2019
Q1: मैथिलीशरण गुप्त की कविता 'मनुष्यता' के आधार पर लिखिए कि सच्चा मनुष्य कौन है?
Ans: कविता के अनुसार, सच्चा मनुष्य वह है जिसके मन में त्याग, बलिदान और परोपकार की भावना हो। जो "वसुधैव कुटुम्बकम" में विश्वास रखता हो, धन का घमंड न करता हो और विपत्ति में दूसरों का सहारा बनता हो। वही मनुष्य है जो मनुष्य के लिए मरे।
CBSE 2020
Q2: रंतिदेव और दधीचि के उदाहरणों का 'मनुष्यता' कविता में क्या औचित्य है?
Ans: ये उदाहरण सिद्ध करते हैं कि भारतीय संस्कृति में त्याग का स्थान सर्वोच्च है। रंतिदेव ने भूख में अपना भोजन दान किया और दधीचि ने परहित के लिए शरीर त्यागा। ये उदाहरण पाठकों को प्रेरित करते हैं कि शरीर नश्वर है, लेकिन कीर्ति अमर है।
CBSE 2018
Q3: ‘अनाथ कौन है यहाँ? त्रिलोकनाथ साथ हैं’ − पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
Ans: कवि मनुष्य को सांत्वना देते हुए कहते हैं कि इस संसार में कोई भी व्यक्ति अनाथ या बेसहारा नहीं है। ईश्वर (त्रिलोकनाथ) सबके पिता हैं और वे दयालु हैं। उनकी विशाल भुजाएं सबकी मदद के लिए तैयार हैं। इसलिए मनुष्य को कभी भी खुद को अकेला या कमजोर नहीं समझना चाहिए।
CBSE 2022
Q4: मनुष्यता कविता में 'आत्मभाव' का विस्तार करने पर क्यों बल दिया गया है?
Ans: आत्मभाव का अर्थ है - सबको अपने समान समझना। जब हम आत्मभाव का विस्तार करते हैं, तो परायापन समाप्त हो जाता है और हम दूसरों के दुख को अपना दुख समझने लगते हैं। इसी से विश्व में शांति और भाईचारा स्थापित हो सकता है।
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