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Class 10 Hindi
Chapter 4

पर्वत प्रदेश में पावस

इस कविता में पर्वतीय प्रदेश में वर्षा ऋतु के पल-पल बदलते प्राकृतिक सौंदर्य, झरनों के संगीत और बादलों के जादुई दृश्यों का अत्यंत सजीव और चित्रात्मक वर्णन किया गया है।

पर्वत प्रदेश में पावस - सम्पूर्ण व्याख्या

पर्वत प्रदेश में पावस - सम्पूर्ण व्याख्या
पाठ परिचय

प्रकृति के सुकुमार कवि 'सुमित्रानंदन पंत' द्वारा रचित यह कविता वर्षा ऋतु में पहाड़ों की सुंदरता का वर्णन करती है। यहाँ प्रकृति किसी बहुरूपिया की तरह पल-पल अपना वेश बदलती है।

काव्यांश 1

पावस ऋतु थी, पर्वत प्रदेश,
पल-पल परिवर्तित प्रकृति-वेश।
मेखलाकार पर्वत अपार
अपने सहस्र दृग-सुमन फाड़,
अवलोक रहा है बार-बार
नीचे जल में निज महाकार,
जिसके चरणों में पला ताल
दर्पण-सा फैला है विशाल!

व्याख्या पर्वतीय क्षेत्र में वर्षा ऋतु का समय है। प्रकृति का रूप हर पल बदल रहा है (कभी धूप, कभी बादल)। करधनी (कमरबंद) के आकार वाला विशाल पर्वत अपने हजारों फूल रूपी आँखों (दृग-सुमन) को फाड़कर नीचे तलहटी में देख रहा है। पर्वत के चरणों में एक विशाल तालाब (ताल) है, जो साफ़ और शांत है। वह तालाब एक दर्पण (आईने) की तरह लग रहा है जिसमें पर्वत अपना विशाल आकार (महाकार) निहार रहा है।

शब्दार्थ:
शब्दअर्थ
पावसवर्षा ऋतु
मेखलाकारकरधनी के आकार का (ढलान वाला)
दृग-सुमननेत्र रूपी पुष्प
महाकारविशाल आकार

काव्यांश 2

गिरि का गौरव गाकर झर-झर
मद में नस-नस उत्तेजित कर
मोती की लड़ियों-से सुंदर
झरते हैं झाग भरे निर्झर!
गिरिवर के उर से उठ-उठ कर
उच्चाकांशाओं से तरुवर
हैं झाँक रहे नीरव नभ पर
अनिमेष, अटल, कुछ चिंतापर।

व्याख्या पहाड़ों से गिरते हुए सफ़ेद झागदार झरने ऐसे लग रहे हैं जैसे मोतियों की लड़ियाँ लटक रही हों। झरनों की आवाज़ ऐसी लगती है मानो वे पर्वत की महानता (गौरव) का गुणगान कर रहे हों। यह आवाज़ नस-नस में जोश भर देती है।
पहाड़ के हृदय (उर) से उगने वाले ऊँचे-ऊँचे पेड़ आकाश की ओर एकटक (अनिमेष) और स्थिर होकर देख रहे हैं। वे मानवीय 'ऊँची आकांक्षाओं' (Ambitions) के प्रतीक हैं, जो आकाश को छूना चाहते हैं, पर साथ ही कुछ चिंतित भी लग रहे हैं।

शब्दअर्थ
निर्झरझरना
उरहृदय / छाती
तरुवरपेड़
अनिमेषएकटक / बिना पलक झपकाए

काव्यांश 3

उड़ गया, अचानक लो, भूधर
फड़का अपार पारद के पर!
रव-शेष रह गए हैं निर्झर!
है टूट पड़ा भू पर अंबर!
धँस गए धरा में सभय शाल!
उठ रहा धुआँ, जल गया ताल!
-यों जलद-यान में विचर-विचर
था इंद्र खेलता इंद्रजाल।

व्याख्या अचानक बादल छा जाने से ऐसा लगता है मानो पूरा पहाड़ (भूधर) पारे (Mercury) जैसे चमकीले पंख लगाकर उड़ गया हो। कोहरे के कारण झरने दिखाई नहीं दे रहे, केवल उनकी आवाज़ (रव) सुनाई दे रही है। ऐसा लगता है जैसे आकाश धरती पर टूट पड़ा हो।
तेज बारिश और धुंध के कारण 'शाल' के विशाल पेड़ डरकर (सभय) धरती में धँस गए हैं। तालाब से धुआँ उठ रहा है (वाष्प), मानो तालाब में आग लग गई हो। यह सब देखकर लगता है जैसे वर्षा का देवता 'इंद्र' अपने बादल रूपी विमान (जलद-यान) में घूम-घूमकर कोई जादू (इंद्रजाल) दिखा रहा हो।

शब्दअर्थ
भूधरपर्वत
पारद के परपारे (Mercury) के समान चमकीले पंख (बादल)
रव-शेषकेवल आवाज़ रह जाना
सभयभय के साथ (डरकर)
जलद-यानबादल रूपी विमान
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पाठ सार

इस वीडियो में दसवीं कोर्स B स्पर्श की कवि सुमित्रानंदन पंत द्वारा रचित 'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता को बहुत ही आसान तरीके से समझाया गया है ।

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प्रश्नोत्तर

इस वीडियो में दसवीं कोर्स B स्पर्श की कवि सुमित्रानंदन पंत द्वारा रचित 'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता के पाठगत प्रश्नों को समझाया गया है। इसके अलावा परिक्षोप्योगी 20 अत्यधिक महत्वपूर्ण अन्य प्रश्नों का भी समावेश किया गया है।

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MCQs

इस वीडियो में दसवीं कोर्स B पाठ 5 स्पर्श की कवि सुमित्रानंदन पंत द्वारा रचित 'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता के परिक्षोप्योगी 40 अत्यधिक महत्वपूर्ण बहुविकल्पात्मक प्रश्नों को हल किया गया है।

Textbook Questions
Q1: पावस ऋतु में प्रकृति में कौन-कौन से परिवर्तन आते हैं? कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
Ans: पावस ऋतु (वर्षा) में प्रकृति का रूप पल-पल बदलता है। कभी धूप खिलती है तो कभी घने बादल छा जाते हैं। पहाड़ अपनी हजार आँखों (फूलों) से खुद को देखता है। झरने मोतियों की तरह बहते हैं। अचानक कोहरा छाने से पहाड़ अदृश्य हो जाते हैं और लगता है जैसे आकाश धरती पर टूट पड़ा हो।
Q2: ‘मेखलाकार’ शब्द का क्या अर्थ है? कवि ने इस शब्द का प्रयोग यहाँ क्यों किया है?
Ans: ‘मेखलाकार’ का अर्थ है- करधनी (कमरबंद) के आकार का। कवि ने इसका प्रयोग इसलिए किया है क्योंकि पर्वत की ढलान गोलाकार रूप में फैली हुई है, जो देखने में ऐसा लगता है जैसे पृथ्वी ने अपनी कमर में करधनी पहनी हो।
Q3: ‘सहस्र दृग-सुमन’ से क्या तात्पर्य है? कवि ने इस पद का प्रयोग किसके लिए किया है?
Ans: ‘सहस्र’ का अर्थ है हजार, ‘दृग’ का अर्थ है आँखें और ‘सुमन’ का अर्थ है फूल। इसका तात्पर्य है- हजारों फूल रूपी आँखें। कवि ने इसका प्रयोग पर्वत पर खिले हुए हजारों रंग-बिरंगे फूलों के लिए किया है, जिनसे पर्वत अपने प्रतिबिंब को निहार रहा है।
Q4: कवि ने तालाब की समानता किसके साथ दिखाई है और क्यों?
Ans: कवि ने तालाब की समानता 'दर्पण' (आईने) से की है। तालाब का जल अत्यंत स्वच्छ और निर्मल है। जैसे दर्पण में प्रतिबिंब साफ़ दिखता है, वैसे ही तालाब में विशाल पर्वत का प्रतिबिंब स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
Q5: पर्वत के हृदय से उठकर ऊँचे-ऊँचे वृक्ष आकाश की ओर क्यों देख रहे हैं और वे किस बात को प्रतिबिंबित करते हैं?
Ans: वृक्ष आकाश की ओर इसलिए देख रहे हैं मानो वे उसे छूना चाहते हैं। वे शांत और स्थिर होकर किसी चिंता में डूबे हुए लगते हैं। वे मनुष्यों की 'उच्च आकांक्षाओं' (High Ambitions) को प्रतिबिंबित करते हैं जो हमेशा ऊपर उठने और ऊंचाइयों को छूने की चाह रखते हैं।
Q6: शाल के वृक्ष भयभीत होकर धरती में क्यों धँस गए?
Ans: अचानक धुंध और कोहरा छा जाने से वातावरण अंधकारमय हो गया। ऐसा लगा जैसे आकाश धरती पर टूट पड़ा हो। इस भयानक दृश्य के कारण (प्रतीकात्मक रूप में) शाल के वृक्ष डर गए और ऐसा लगा मानो वे भयभीत होकर धरती में धँस गए हों।
Q7: झरने किसके गौरव का गान कर रहे हैं? बहते हुए झरने की तुलना किससे की गई है?
Ans: झरने पर्वत की महानता और विशालता (गौरव) का गान कर रहे हैं। बहते हुए झरनों की तुलना 'मोतियों की लड़ियों' से की गई है क्योंकि उनका सफ़ेद झागदार पानी मोतियों की माला जैसा सुंदर लगता है।
Extra Questions
Q8: कविता में "इंद्रजाल" किसे कहा गया है और क्यों?
Ans: कविता में प्रकृति के पल-पल बदलते रूप को "इंद्रजाल" (जादू) कहा गया है। कभी धूप, कभी वर्षा, कभी कोहरा और कभी गायब होते पहाड़—ये सब दृश्य किसी जादूगर के खेल जैसे लगते हैं, जिसे वर्षा के देवता इंद्र अपने बादल रूपी विमान में बैठकर दिखा रहे हैं।
Q9: पर्वत प्रदेश में पावस कविता में "मानवीकरण अलंकार" का प्रयोग कहाँ-कहाँ हुआ है?
Ans: 1. पर्वत का अपनी फूल रूपी आँखों से देखना।
2. झरनों का गौरव गान करना।
3. पेड़ों का चिंता में आकाश को देखना।
4. तालाब का दर्पण बनकर लेटे रहना।
इन सभी स्थलों पर प्रकृति को मानव जैसी क्रियाएं करते दिखाया गया है।
1. कवि सुमित्रानंदन पंत को किस रूप में जाना जाता है?
A वीर रस के कवि
B प्रकृति के सुकुमार कवि
C व्यंग्यकार
D क्रांतिकारी कवि
Correct: B
पंत जी छायावादी युग के प्रमुख स्तंभ और प्रकृति प्रेमी कवि हैं।
2. प्रस्तुत कविता में किस ऋतु का वर्णन है?
A ग्रीष्म
B शरद
C पावस (वर्षा)
D वसंत
Correct: C
शीर्षक ही है - पर्वत प्रदेश में पावस (वर्षा)।
3. "मेखलाकार" शब्द का क्या अर्थ है?
A बादल के आकार का
B करधनी (कमरबंद) के आकार का
C फूल के आकार का
D मेढ़क जैसा
Correct: B
पहाड़ का ढलान ऐसा है जैसे कमर में करधनी पहनी हो।
4. पर्वत की आँखें किसे कहा गया है?
A पत्थरों को
B झरनों को
C हजारों फूलों (दृग-सुमन) को
D गुफाओं को
Correct: C
पर्वत पर खिले हजारों फूल उसकी आँखों के समान हैं।
5. पर्वत अपना प्रतिबिम्ब कहाँ देख रहा है?
A नदी में
B सागर में
C तालाब (ताल) में
D आइने में
Correct: C
पर्वत के चरणों में स्थित तालाब में वह अपना अक्स देख रहा है।
6. "महाकार" शब्द किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
A बादलों के लिए
B तालाब के लिए
C पर्वत के विशाल आकार के लिए
D आकाश के लिए
Correct: C
पर्वत अपने "महाकार" (विशाल शरीर) को देख रहा है।
7. तालाब की तुलना किससे की गई है?
A चाँदी से
B दर्पण (Mirror) से
C मोती से
D पारे से
Correct: B
स्वच्छ जल होने के कारण उसे "दर्पण-सा फैला है विशाल" कहा गया है।
8. "दृग-सुमन" में कौन सा अलंकार है?
A उपमा
B रूपक
C यमक
D श्लेष
Correct: B
सुमन (फूल) रूपी दृग (आँखें) - यहाँ रूपक अलंकार है।
9. पर्वत अपने सुमन-दृगों को फाड़कर क्या कर रहा है?
A रो रहा है
B सो रहा है
C अपने रूप को निहार रहा है
D बादलों को देख रहा है
Correct: C
वह तालाब रूपी दर्पण में खुद को देख रहा है।
10. "निज" शब्द का अर्थ है?
A निजी / अपना
B नीचे
C नया
D नज़ारा
Correct: A
निज महाकार = अपना विशाल आकार।
11. झरनों की तुलना किससे की गई है?
A साँपों से
B रस्सियों से
C मोतियों की लड़ियों से
D दूध की धारा से
Correct: C
सफ़ेद झागदार झरने मोतियों की माला जैसे लग रहे हैं।
12. झरने किसका गौरव गा रहे हैं?
A ईश्वर का
B नदियों का
C गिरि (पर्वत) का
D बादलों का
Correct: C
"गिरि का गौरव गाकर झर-झर।"
13. झरनों का स्वर नस-नस में क्या भर देता है?
A डर
B मद (मस्ती) और उत्तेजना
C नींद
D गुस्सा
Correct: B
झरनों का संगीत रोम-रोम में उत्साह भर देता है।
14. "गिरिवर" शब्द का क्या अर्थ है?
A पहाड़ों में श्रेष्ठ (पर्वत)
B गिरा हुआ
C वरदान
D जंगल
Correct: A
गिरिवर का अर्थ श्रेष्ठ पर्वत है।
15. पर्वत के हृदय से उठकर पेड़ क्या कर रहे हैं?
A नाच रहे हैं
B आकाश की ओर झाँक रहे हैं
C सो रहे हैं
D फल दे रहे हैं
Correct: B
वे ऊँचे उठकर आकाश को देख रहे हैं।
16. पेड़ किसका प्रतीक हैं?
A हरियाली का
B पक्षियों के घर का
C मनुष्य की उच्च आकांक्षाओं का
D बादलों का
Correct: C
वे ऊँचा उठने की मानवीय इच्छाओं (Ambitions) के प्रतीक हैं।
17. "अनिमेष" देखने का क्या अर्थ है?
A कभी-कभी देखना
B पलक झपकाते हुए
C एकटक / लगातार देखना
D आँख बंद करके
Correct: C
अनिमेष मतलब बिना पलक गिराए देखना।
18. पेड़ "चिंतित" क्यों लग रहे हैं?
A क्योंकि बारिश हो रही है
B क्योंकि वे आकाश के रहस्य को पाना चाहते हैं (असंभव को छूना चाहते हैं)
C क्योंकि वे गिर रहे हैं
D कोई कारण नहीं
Correct: B
उच्चाकांक्षाएं अक्सर चिंता भी साथ लाती हैं।
19. "झाग भरे निर्झर" में "निर्झर" का क्या अर्थ है?
A झरना
B निडर
C बूढ़ा
D नदी
Correct: A
निर्झर मतलब झरना।
20. "मद में नस-नस उत्तेजित कर" - यहाँ "मद" का अर्थ है?
A शराब
B मस्ती / आनंद
C अहंकार
D मदद
Correct: B
झरनों की आवाज़ मस्ती भर देती है।
21. अचानक कौन उड़ गया?
A पक्षी
B भूधर (पर्वत)
C विमान
D इंद्र
Correct: B
बादलों के छाने से लगा जैसे पहाड़ ही उड़ गया हो।
22. पर्वत ने किसके पंख लगाकर उड़ान भरी?
A बाज के
B मोर के
C पारद (पारे) के / बादलों के
D सोने के
Correct: C
चमकीले बादलों को "पारद के पर" कहा गया है।
23. "रव-शेष" रह जाने का क्या तात्पर्य है?
A सब कुछ शांत हो जाना
B केवल आवाज़ सुनाई देना, दृश्य नहीं
C शोर मच जाना
D रवि (सूर्य) का छिप जाना
Correct: B
कोहरे में झरने नहीं दिख रहे, सिर्फ उनकी आवाज़ (रव) बची है।
24. "टूट पड़ा भू पर अंबर" का क्या अर्थ है?
A आसमान गिर गया
B बहुत तेज मूसलाधार बारिश होना
C बिजली गिरना
D भूकंप आना
Correct: B
इतनी तेज बारिश हुई जैसे आकाश धरती पर टूट पड़ा हो।
25. "शाल" के पेड़ कहाँ धँस गए?
A कीचड़ में
B पानी में
C धरा (धरती) में
D पाताल में
Correct: C
धुंध के कारण ऐसा भ्रम हुआ जैसे पेड़ डरकर धरती में घुस गए हैं।
26. शाल के पेड़ क्यों भयभीत हो गए?
A तूफान के कारण
B आग लगने से
C धुंध और भयानक वातावरण के कारण
D बाढ़ आने से
Correct: C
प्रकृति का रौद्र रूप देखकर वे "सभय" (डर के साथ) धँस गए।
27. तालाब से धुआँ क्यों उठ रहा है?
A आग लगने के कारण
B कोहरे/धुंध के कारण
C पानी उबलने के कारण
D प्रदूषण के कारण
Correct: B
बारिश और कोहरे के कारण जलवाष्प धुएं जैसी लग रही है।
28. "जल गया ताल" - इसमें कौन सा अलंकार है?
A उत्प्रेक्षा
B भ्रांतिमान
C उपमा
D मानवीकरण
Correct: C
यहाँ धुंध को देखकर आग लगने का भ्रम/तुलना है (प्रतीकात्मक)।
29. इंद्रजाल कौन खेल रहा है?
A जादूगर
B कवि
C इंद्र देवता
D पर्वत
Correct: C
वर्षा के देवता इंद्र यह सारा खेल रच रहे हैं।
30. "जलद-यान" का क्या अर्थ है?
A पानी का जहाज
B बादल रूपी विमान
C जल्दी चलने वाला
D रथ
Correct: B
जलद (बादल) + यान (विमान)।
31. कविता में प्रकृति को किस रूप में चित्रित किया गया है?
A निर्जीव
B भयानक
C पल-पल वेश बदलने वाली (बहुरूपिया)
D स्थिर
Correct: C
प्रकृति हर पल अपना रूप बदल रही है।
32. "भूधर" का पर्यायवाची नहीं है?
A पहाड़
B नग
C शैल
D भुजंग
Correct: D
भुजंग का अर्थ साँप होता है।
33. इस कविता में किस शैली का प्रयोग है?
A चित्रात्मक शैली
B व्यंग्यात्मक
C संवादात्मक
D कथात्मक
Correct: A
पढ़ते समय आँखों के सामने चित्र बन जाते हैं (Imagery)।
34. पंत जी की भाषा कैसी है?
A उर्दू प्रधान
B खड़ी बोली हिंदी (तत्सम प्रधान)
C ब्रज
D अवधी
Correct: B
संस्कृतनिष्ठ खड़ी बोली।
35. "सभय" शब्द में उपसर्ग क्या है?
A
B सभ
C भय
D
Correct: A
स + भय = सभय (भय के साथ)।
36. "मिरर" (Mirror) के लिए कविता में कौन सा शब्द आया है?
A शीशा
B दर्पण
C मुकुर
D आरसी
Correct: B
"दर्पण-सा फैला है विशाल"।
37. "उच्चाकांक्षा" का संधि विच्छेद है?
A उच्च + आकांक्षा
B उच्चा + कांक्षा
C उच + आकांक्षा
D उच्च + आकाशा
Correct: A
उच्च + आकांक्षा (दीर्घ संधि)।
38. "नीरव नभ" में "नीरव" का क्या अर्थ है?
A नीला
B शांत / शब्द रहित
C पानी से भरा
D नया
Correct: B
नीरव का अर्थ है शांत (Ni + Rav)।
39. "पारद के पर" में कौन सा अलंकार है?
A यमक
B अनुप्रास
C उपमा
D रूपक
Correct: B
"प" वर्ण की आवृत्ति (अनुप्रास)। साथ ही "पारे जैसे पंख" (उपमा का भाव) भी है।
40. तालाब में किसका प्रतिबिम्ब दिखाई दे रहा है?
A चाँद का
B सूरज का
C पर्वत और फूलों का
D पक्षियों का
Correct: C
पर्वत अपने फूलों वाली आँखों से खुद को देख रहा है।
41. "अचल" किसका पर्यायवाची है?
A पर्वत
B नदी
C हवा
D बादल
Correct: A
जो चल न सके = पर्वत।
42. कविता के अंत में पूरा दृश्य कैसा हो जाता है?
A सुहावना
B रहस्यमयी और धुंधला
C साफ
D गर्म
Correct: B
कोहरे के कारण सब कुछ रहस्यमयी हो जाता है।
43. इंद्र किस में बैठकर जादू दिखा रहा है?
A रथ में
B बादलों में (जलद-यान)
C हवाई जहाज में
D पहाड़ पर
Correct: B
वह बादलों रूपी विमान में विचरण कर रहा है।
44. "अंबर" का विलोम शब्द है?
A आकाश
B गगन
C धरा / अवनी
D नभ
Correct: C
अंबर (आकाश) का उल्टा धरा (धरती)।
45. झाग भरे झरने क्या संदेश देते हैं?
A रुक जाने का
B गतिशीलता और जीवन शक्ति का
C शांत रहने का
D पीछे मुड़ने का
Correct: B
वे जीवन में निरंतर आगे बढ़ने का प्रतीक हैं।
46. इस कविता में "मानवीकरण अलंकार" (Personification) का प्रयोग कहाँ हुआ है?
A पर्वत का देखना
B पेड़ों का झाँकना
C झरनों का गाना
D उपर्युक्त सभी
Correct: D
प्रकृति के सभी अंगों को मानव जैसी क्रियाएं करते दिखाया गया है।
47. "सहस्र" का अर्थ क्या है?
A सौ
B हजार
C लाख
D दस
Correct: B
सहस्र मतलब हजार।
48. "तरुवर" का तत्सम रूप क्या है?
A तरु
B वृक्ष
C पेड़
D पादप
Correct: B
तरुवर खुद तत्सम है, इसका अर्थ श्रेष्ठ वृक्ष है।
49. "पल-पल परिवर्तित प्रकृति-वेश" में कौन सा अलंकार है?
A अनुप्रास
B यमक
C श्लेष
D वक्रोक्ति
Correct: A
"प" वर्ण की आवृत्ति।
50. कवि को पहाड़ उड़ता हुआ क्यों प्रतीत होता है?
A जादू के कारण
B बादलों की गति और धुंध के कारण
C पहाड़ सच में उड़ रहा है
D भूकंप के कारण
Correct: B
तेज गति से उड़ते बादलों ने पहाड़ को ढक लिया है।
51. "वारि" और "वारी" में क्या अंतर है?
A दोनों एक हैं
B वारि = पानी, वारी = न्योछावर करना
C वारि = हवा, वारी = पानी
D कोई नहीं
Correct: B
इस कविता के संदर्भ में जल (वारि/पावस) महत्वपूर्ण है।
52. "गौरव गाकर" में कौन सा अलंकार है?
A अनुप्रास
B यमक
C श्लेष
D उपमा
Correct: A
"ग" वर्ण की आवृत्ति।
53. पहाड़ के चरणों में पला ताल किसके समान है?
A पुत्र के समान
B शत्रु के समान
C मित्र के समान
D दास के समान
Correct: A
वह चरणों में पला है, यानी आश्रित या पुत्रवत है।
54. "इंद्रजाल" का लाक्षणिक अर्थ क्या है?
A जाल बुनना
B कौतुक / माया / जादू
C मछली पकड़ना
D युद्ध करना
Correct: B
प्रकृति का जादुई बदलाव।
55. वर्षा ऋतु में पहाड़ का दृश्य कैसा होता है?
A डरावना
B मनमोहक और परिवर्तनीय
C नीरस
D स्थिर
Correct: B
अत्यंत सुंदर और बदलने वाला।
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CBSE 2019
Q1: ‘है टूट पड़ा भू पर अंबर’ पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
Ans: इस पंक्ति का भाव है कि वर्षा इतनी मूसलाधार और तेज हो रही है, साथ ही चारों तरफ इतना घना कोहरा छा गया है कि ऐसा लगता है मानो आकाश और धरती मिल गए हों या आकाश टूटकर धरती पर गिर पड़ा हो। दृश्यता (Visibility) शून्य हो गई है।
CBSE 2020
Q2: सुमित्रानंदन पंत की कविता के आधार पर पर्वतीय प्रदेश की वर्षा ऋतु का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
Ans: पर्वतीय प्रदेश में वर्षा ऋतु जादुई होती है। प्रकृति हर पल रंग बदलती है। पहाड़ दर्पण जैसे तालाब में अपना रूप निहारते हैं। झरने संगीत बिखेरते हैं। अचानक बादल छाने पर पहाड़ गायब हो जाते हैं और धुंध के कारण तालाब से धुआँ उठता हुआ प्रतीत होता है। यह दृश्य अत्यंत रोमांचक होता है।
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